कश्मीर
१.
कौन है यह राष्ट्र, यह धृत राष्ट्र
यहाँ अंधी नाचती है योगमाया,
कठपुतली सी,
धागे बांधे अँगुलियों में हुक्मरान ने
कुटिल भुजंगिनी भारत क़ी सरकार-
एक समूची सभ्य जाति क़ी बलि लेकर भी
दांत दिखाती, लालकिले से करती जाये टनों मसखरी
बांटे रेवड़ियाँ अपने कश्मीरी चेलों को
ज़री-काम करती भाषण में,
चाक करे है दिल दिमाग.
२.
सस्ती मौत, सस्ती मौत
बेहद सस्ती मौत!
गोली से लाठी से चाकू-संगीनों से
आंसू गैस से बम से
छर्रों से वाटर पाईप से
तन से मन से धन से
मारो, मारो मारो
लालकिले से
मारो
भूख गरीबी महंगाई सब चंडूखाने क़ी गप्पें हैं!
मारो, इस्लामाबाद से मारो
घर में घुस कर मारो
गली गली में मारो
बाढ़ लगी है
घर-दुआर औ पशू-परानी, गल्ला-गेहूं, छाता-जूता नाश हो गए!
जनता को यह चिल्लाने दो !
भाई अब्दुल्ला जी आओ
हाथ मिलाओ
पैसा लाओ पैसा खाओ पैसे से बारूद खरीदो
पैसे फेंक तमाशा देखो हत्या कर दो रोजगार क़ी
बेचो नफरत हिंसा क़ी दूकान चलाओ
अर्थी काढो दफ़न करो आज़ाद सोच को
रोज़ नहाओ टटके टटके रक्त कुंड में
मांस और हड्डी से फिर से नक्शा भर दो
इसके भी भीतर गर हो आत्मा साली
पकड़ खींच लो बड़े कैम्प में
याद दिलाओ मनोरमा क़ी
बच्चों क़ी चीखों के बंदनवार सजा लो
फिर भाषण दो आज़ादी पर
फिर भाषण दो समाधान पर
फिर भाषण दो लोकतंत्र पर
फिर भाषण दो
"गर फिरदौस...
मर फिरदौस
AFSPA के नीचे
संगीनों क़ी हरी दरी पर
मर फिरदौस
३.
फिरदौस,
बच्चों का कफ़न दफ़न घर में करो
फुसफुसाते हुए बात करो
चुप्पी में चिल्लाओ चीखो
बाहर मत निकलो
सड़क का नाम मत लेना
न ही सांस लो जोर से
ये मुल्क एक जेल बना दिया गया है
और कश्मीर उस जेल क़ी कालकोठरी
और तुम्हारा घर
कत्लगाह
रोना भी नहीं
क्यूंकि पाकिस्तानी बता दिए जाओगे
हंसना भी नहीं
अब्दुल्ला हंसी क़ि प्रदर्शनी दिल्ली में लगाने वाला है
सांस लेना बंद कर दो और
दिल निकाल कर रख लो अपनी मुट्ठी में
आँखे जेबों में दफ्न करो
कान काट दो
त्वचा क़ी केंचुल छुपा दो जमीन में
और अपने प्राण...
किसी बूढ़े बरगद क़ी खोखल में चुन दो
४.
कभी तो कोई आयेगा
जो सब कुछ इकट्ठा करेगा
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