जंतर-मंतर पर धरना है.....
भ्रष्टाचारी कांगरेस की लीला की बलिहारी
लोकपाल, दिक्पालों के बस, जनता है बेचारी
नेता-अफसर सब लीलाधर, सत्ता मद में चूर
मिस्टर राहुल कुछ फरमाओ बोलो तनिक हुजूर
अन्ना अनशन पर, उस का चश्मा है हिन्दुस्तानी
संग साथ जन गण मन है , सो बेकल हो गयी रानी
कांगरेस की बिल्ली को लो याद आ गयी नानी
एक आँख से दुनिया देखे साधो बौरानी
भाजपाईयों की नौटंकी, दसटंकी है चालू
कहाँ नहीं भ्रष्टाचारी, कौन नही घोटालू
यह ढांके तो वह खुल जाए वह ढांके तो पोल
राजनीति की चतुर चिकटई, सारी दुनिया गोल
नक्शा झाड़ रहे मंत्रीगण स्विस बैंक के बूते
टाटा, बाटा, अम्बानी के चाटो भईया जूते
धूर-मलाई चाभो, चाभो जनता के अरमान
सौ करोड़ की करो तस्करी, ऊंची भरो उड़ान
पान चबाओ, उस में डालो मजदूरों का रक्त
अलबेले बाबाओं के तुम नए नवेले भक्त
नाजायज पैसे के मारे जब अफराये पेट
चूरन फांक दलाली का फिर नया खोल दो रेट
अन्ना बाबा याद नहीं क्या यहीं कहीं सुखराम
हरषद मेहता, तेलगी साहब सब करते विश्राम
शीबू जी सोरेन यहीं, बाबू परमोद महाज़न
राजा, कलमाडी, मधु कोड़ा, रमलिंगम सत्यम
लालू की यह चरागाह है, माटी है बोफोर्स की
शशि थरूर की, मोदी जी की, तिकड़म-ताले-सोर्स की
अभिनन्दन है पैलागी है, पूजा है शैतान की
इस माटी का तिलक लगाओ धरती यह बलिदान की
मनमोहक खूंखार सिंह ने चिड़ी का गुल्लू मारा
अन्ना बापू समझे रहना ये है चतुर पसारा
जीते रहना और समझना इनकी मेहीं चाल
अमरीकी आकाओं के ये देशी ठेठ दलाल
ठग विद्या में माहिर हैं ये लंबा-चौड़ा जाल
गांधी बाबा की समाधि पर आयोजित हो यज्ञ
समिधा नाजायज पैसा हो, होता जन सर्वग्य
लपटें निकालें संघर्षों की, यज्ञ धूम आन्दोलन
शुद्ध होय यह भूमि हमारी, मुदित होयं जन-गण-मन
खाली लोकपाल से कैसे, तिरे भ्रष्ट भव सागर
कारपोरेट से सरकारी तक, डूबी जिसमें गागर
एड़ी से चोटी तक डूबा, टंट-घंट सत्ता का
दिल्ली का, चेन्नई का, मुंबई का और कलकत्ता का
लोकपाल बिल से निकलेगी, आगे और लड़ाई
दम ले, काँधे जोड़, साथियों, भिड़ने की रुत आई
दुश्मन है खूंखार चतुर्दिक पसरी है परछाई
आगे बढ़, तैयारी कर, है लम्बी बहुत चढ़ाई
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