13/12/2011

 दो वि-पद 


(सूर की गोपियों से क्षमा याचना सहित)

आयो घोष बड़ो व्यापारी
देश कटोरा खुदरा चाऊर दूध दूह जेवनारी
ब्रज गोधन के ललित कान में बैंक उधार चिन्हारी
देश देश से लूट गठरिया जम्मू दीप उतारी
छोट-सांवरी, नून-तेल, कपड़ा-लत्ता, तरकारी
हाट-बाट सब खंड-भंड कै, वाल मार्ट सरकारी
ईस्ट इंडिया प्रगट भई, अबकी दक्षिण दरबारी 
उधो भागहु प्रान बचावहु,  अब छोटकन कै बारी


2.

उधो, आई एफ्फ़ डियाई
लि-बरटी मईया मंदी से सूखि भई चौथाई
ज्ञान गठरिया तुम्हरी भंवरा, लूटि-लूटि लै जाई
केतने 'अरब' लूटि के लै गयी, केतने सरग बनाई
केतने देश बीरान सुन्न भै, कंह नहीं छार उडाई
वाल-स्ट्रीट पे धक्का पाई के, सुरसा मुंह फैलाई
आंखि चमकती, कान फरकते, लाभ चाह बौराई
आपै अपनी कबर खोदने, खोदनहार बोलाई