स्याह हाशिये
02/01/2012
मशरूफियत
गुलेल सी लगती है घंटी
पत्थर सी ठोस ध्वनि
कानों को चीरती मीठी उद्घोषणा
जब भी अपना नंबर मिलाता हूँ
व्यस्त ही जाता है.
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