12/07/2012


नींद टूटने के बाद

एक रोज उठूंगा अल-सुबह
सारे अखबार भरे होंगे विज्ञापन की खबर से
टोटियों में नहीं होगा कोई बूँद पानी
न्याय की देवी के हिजाब से
झांकेगा दोमुंहा सांप
हाथों में थाम हैंड ग्रेनेड भरे झोले
चप्पे-चप्पे पर मौजूद होंगे सिपाही अदृश्य  
शहरों के हर लैम्पपोस्ट पर लटकेगी
बेरोजगार दोस्तों की लाश !

एक रोज उठूंगा सुनते हुए
इदमेकः, अयमेकः
एक से हथियार,
प्रेम भी एक सा ही
वाल स्ट्रीट, पेंटागन,
भन-भन-भन, एक सी उदासी,
बोसीदा गंध की परत चौड़ी
शहर के मुहाने पर स्वागत में नाले
रातों-रात गायब हो जायेंगे मुल्कों के जाने-पहचाने वे हिस्से  
दुनिया के नक़्शे से
पंडोरा बक्से में बंद सभ्यताएं
सौ कतरे मन के

अयं निजः इदं निजः
स्मित आनन वही मनु
दर्पण निहारेगा निज की यूरोकृत छवि
पिपिहरी बजायेगा सब-ज्ञाता कवि

उस रात
आपरेशन-थियेटर उगेंगे धरती पर
विचित्र धुंधली रोशनी से भरे
लंबे नुकीले दांतों से चीथी जायेंगी
एनिमिक भाषाएँ, जरबा जन
अबूझमाड़

बाकी बची दक्षिणी पृथ्वी को
लिए-दिए जेब में
सुबह-सुबह निकलेगा शहंशाह
घेर कर छुपा देगा मल के प्रकोष्ठ में
मुदित देवतागण
बरसायेंगें यूरो और डालर के नवल पुष्प

सुबह की रात है पर
इस भीषण रात की
सुबह नहीं होने वाली
गर्दन पर पड़ते दबावों के बावजूद
कंधे पर लाद इसे
लाया हूँ आप तक
लीजिए ...
संभालिए !